सद्दाम के साये से अमेरिका की आमद तक: टर्टल्स कैन ...
Posted by Arif Aziz | Apr 19, 2026 | Movie Review, Reviews | 0 |
तेहरान: सिनेमा के परदे पर कूटनीति और नैरेटिव का खे...
Posted by Arif Aziz | Apr 4, 2026 | Geo Politics, Movie Review | 0 |
पमरिया: साझा संस्कृति का बोझ और पसमांदा पहचान का ब...
Posted by Arif Aziz | Apr 2, 2026 | Book Review, Culture and Heritage | 0 |
ए हाउस ऑफ डायनामाइट: बारूद के ढेर पर बैठी दुनिया औ...
Posted by Arif Aziz | Mar 19, 2026 | Geo Politics, Movie Review, Political | 0 |
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Popularपुस्तक समीक्षा: इस्लाम का जन्म और विकास
by Abdullah Mansoor | May 1, 2024 | Book Review | 0 |
मशहूर पाकिस्तानी इतिहासकार मुबारक अली लिखते हैं कि इस्लाम से पहले की तारीख़ दरअसल अरब क़बीलों का इतिहास माना जाता था। इस में हर क़बीले की तारीख़ और इस के रस्म-ओ-रिवाज का बयान किया जाता था। जो व्यक्ति तारीख़ को महफ़ूज़ रखने और फिर इसे बयान करने का काम करते थे उन्हें रावी या अख़बारी कहा जाता था। कुछ इतिहासकार इस्लाम और मुसलमान में फ़र्क़ करते हैं।
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राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका: चुनौतियाँ और समाधान
by Abdullah Mansoor | Sep 7, 2024 | Education and Empowerment | 0 |
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Rick and Morty: एक दार्शनिक-वैज्ञानिक व्यंग्य
by Arif Aziz | Apr 25, 2026 | Movie Review | 0 |
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सद्दाम के साये से अमेरिका की आमद तक: टर्टल्स कैन फ्लाई और कुर्द बच्चों की दास्तान
by Arif Aziz | Apr 19, 2026 | Movie Review, Reviews | 0 |
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Top Ratedफिल्म जो जो रैबिट: नाज़ी प्रोपेगेंडा की ताकत और बाल मनोविज्ञान
by Abdullah Mansoor | Jul 17, 2024 | Movie Review, Reviews | 0 |
जोजो रैबिट (Roman Griffin Davis) 10 साल का एक लड़का है। यह तानाशाह के शासनकाल (Totalitarian regime) में पैदा हुआ है। इसलिए जोजो के लिए स्वतंत्रता, समानता, अधिकार जैसे शब्द कोई मायने नहीं रखते क्योंकि उसने कभी इन शब्दों का अनुभव ही नहीं किया है। जोजो सरकार द्वारा स्थापित हर झूठ को सत्य मानता है। सरकार न सिर्फ डंडे के ज़ोर से अपनी बात मनवाती है बल्कि वह व्यक्तियों के विचारों के परिवर्तन से भी अपने आदेशों का पालन करना सिखाती है। आदेशों को मानने का प्रशिक्षण स्कूलों से दिया जाता है। स्कूल किसी भी विचारधारा को फैलाने के सबसे बड़े माध्यम हैं। हिटलर ने स्कूल के पाठ्यक्रम को अपनी विचारधारा के अनुरूप बदलवा दिया था। वह बच्चों के सैन्य प्रशिक्षण के पक्ष में था, इसके लिए वह बच्चों और युवाओं का कैंप लगवाता था। जर्मन सेना की किसी भी कार्रवाई पर सवाल करना देशद्रोह था। सेना का महिमामंडन किया जाता था ताकि जर्मन सेना द्वारा किए जा रहे अत्याचार किसी को दिखाई न दे। बच्चों के अंदर अंधराष्ट्रवाद को फैलाया जाता था। इसी तरह जोजो भी खुद को हिटलर का सबसे वफादार सिपाही बनाना चाहता है
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Prophet Muhammad: A Life of Leadership and Teaching
by Azeem Ahmed | Oct 6, 2024 | Biography | 0 |
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Rick and Morty: एक दार्शनिक-वैज्ञानिक व्यंग्य
by Arif Aziz | Apr 25, 2026 | Movie Review | 0 |
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LatestRick and Morty: एक दार्शनिक-वैज्ञानिक व्यंग्य
by Arif Aziz | Apr 25, 2026 | Movie Review | 0 |
‘Rick and Morty’ केवल एक एनीमेशन नहीं, बल्कि विज्ञान और दर्शन के संगम पर खड़ा गहरा विमर्श है। यह सीरीज़ शून्यवाद, अस्तित्ववाद और मानवीय अर्थ की खोज को चुनौती देती है, जहाँ रिक सांचेज़ का दृष्टिकोण ब्रह्मांड की निरर्थकता को उजागर करता है, जबकि मोर्टी जीवन के छोटे-छोटे पलों में अर्थ तलाशता है। अंततः, यह कहानी बताती है कि अर्थ हमें दिया नहीं जाता—हमें उसे स्वयं गढ़ना होता है।
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सद्दाम के साये से अमेरिका की आमद तक: टर्टल्स कैन फ्लाई और कुर्द बच्चों की दास्तान
by Arif Aziz | Apr 19, 2026 | Movie Review, Reviews | 0 |
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पसमांदा समाज: संघर्ष से सम्मान और विकास की नई राह
by Arif Aziz | Apr 16, 2026 | Pasmanda Caste | 0 |
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Rick and Morty: एक दार्शनिक-वैज्ञानिक व्यंग्य
by Arif Aziz | Apr 25, 2026 | Movie Review | 0 |
‘Rick and Morty’ केवल एक एनीमेशन नहीं, बल्कि विज्ञान और दर्शन के संगम पर खड़ा गहरा विमर्श है। यह सीरीज़ शून्यवाद, अस्तित्ववाद और मानवीय अर्थ की खोज को चुनौती देती है, जहाँ रिक सांचेज़ का दृष्टिकोण ब्रह्मांड की निरर्थकता को उजागर करता है, जबकि मोर्टी जीवन के छोटे-छोटे पलों में अर्थ तलाशता है। अंततः, यह कहानी बताती है कि अर्थ हमें दिया नहीं जाता—हमें उसे स्वयं गढ़ना होता है।
Read Moreसद्दाम के साये से अमेरिका की आमद तक: टर्टल्स कैन फ्लाई और कुर्द बच्चों की दास्तान
by Arif Aziz | Apr 19, 2026 | Movie Review, Reviews | 0 |
फिल्म ‘टर्टल्स कैन फ्लाई’ के जरिए युद्ध की भयावह सच्चाई और उसके सबसे निर्दयी शिकार—बच्चों—की त्रासदी को बेहद मार्मिक ढंग से सामने लाता है। बहमन घोबादी की संवेदनशील प्रस्तुति दिखाती है कि कैसे बारूदी सुरंगों, हिंसा और असुरक्षा के बीच पलते ये बच्चे बचपन से पहले ही बड़े हो जाते हैं। सैटेलाइट, अग्रिन और हेंगोव जैसे किरदार उम्मीद, पीड़ा और टूटे भ्रम का प्रतीक बनकर उभरते हैं, जो अंततः यह सवाल छोड़ जाते हैं कि क्या किसी भी युद्ध की जीत इंसानियत की इस हार से बड़ी हो सकती है।
Read Moreपसमांदा समाज: संघर्ष से सम्मान और विकास की नई राह
by Arif Aziz | Apr 16, 2026 | Pasmanda Caste | 0 |
पसमांदा समाज, जो लंबे समय तक उपेक्षा का शिकार रहा, आज राष्ट्रीय विमर्श में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। यह बदलाव केवल राजनीतिक स्वीकार्यता का परिणाम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और निरंतर संघर्ष की देन है। अब यह समाज शिक्षा, रोजगार और अधिकारों के प्रति सजग होकर विकास की नई दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
Read Moreशब्बीर अहमद अंसारी: पसमांदा चेतना के अग्रदूत
शब्बीर अहमद अंसारी का जीवन संघर्ष, संवैधानिक चेतना और सामाजिक न्याय की एक प्रेरक कथा है। साधारण पृष्ठभूमि से उठकर उन्होंने मुस्लिम समाज के भीतर मौजूद जातीय असमानताओं को पहचानते हुए चार दशकों तक पसमांदा वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उनका निधन केवल एक व्यक्ति की क्षति नहीं, बल्कि एक वैचारिक शून्य है, जिसे भरना आसान नहीं होगा। उनकी विरासत वंचितों के आत्मसम्मान और अधिकारों की लड़ाई में सदैव जीवित रहेगी।
Read Moreतेहरान: सिनेमा के परदे पर कूटनीति और नैरेटिव का खेल
by Arif Aziz | Apr 4, 2026 | Geo Politics, Movie Review | 0 |
फिल्म ‘तेहरान’ केवल एक जासूसी थ्रिलर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और नैरेटिव की जटिल परतों को उजागर करने का माध्यम बनती है। यह दिल्ली 2012 धमाके को आधार बनाकर ईरान, इज़राइल और अमेरिका के रिश्तों को एक खास नजरिए से प्रस्तुत करती है, जहाँ सिनेमा ‘सॉफ्ट पावर’ बनकर दर्शकों की सोच को प्रभावित करता है। ऐसे में जरूरी है कि दर्शक मनोरंजन के साथ इसके वैचारिक पक्ष को भी समझें।
Read Moreपमरिया: साझा संस्कृति का बोझ और पसमांदा पहचान का बहुजन विमर्श
by Arif Aziz | Apr 2, 2026 | Book Review, Culture and Heritage | 0 |
डा० अयुब राईन की पुस्तक ‘पमरिया’ भारतीय लोक-संस्कृति के उस अनदेखे पक्ष को सामने लाती है, जहाँ मजहबी सीमाओं से परे साझा विरासत जीवित है। पमरिया समुदाय इस सांस्कृतिक समन्वय का जीवंत उदाहरण है।
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