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टॉर्चेस ऑफ़ फ्रीडम: जब नारीवादी आंदोलन को पूंजीवाद ने अपने लाभ के लिए इस्तेमाल किया
by Abdullah Mansoor | Jun 17, 2025 | Movie Review, Reviews | 0 |
नारीवादी आंदोलन ने महिलाओं की आज़ादी, बराबरी और आत्मनिर्भरता का सपना देखा था, लेकिन पूंजीवाद ने इस आंदोलन की भावनाओं को उत्पाद बेचने के औज़ार में बदल दिया। “टॉर्चेस ऑफ़ फ्रीडम” जैसे उदाहरण दिखाते हैं कि बाज़ार कैसे आज़ादी के प्रतीकों को मुनाफे के लिए इस्तेमाल करता है। महिलाओं को स्वतंत्रता का भ्रम दिया गया, जबकि वे एक नई उपभोक्ता संस्कृति में फंस गईं। यह समस्या केवल नारीवाद तक सीमित नहीं, बल्कि हर सामाजिक आंदोलन अब बाज़ार के हिसाब से ढाला जा रहा है। असली आज़ादी सोचने, असहमति जताने और विकल्प चुनने की शक्ति में है।
Read Moreलापता हमारी कहानियाँ
by Abdullah Mansoor | May 30, 2024 | Movie Review, Reviews | 0 |
किरण राव द्वारा निर्देशित “लापता लेडीज़” महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण भारत में महिलाओं द्वारा सामना किए जाने वाले असंख्य सामाजिक मुद्दों के विषयों पर आधारित है। फिल्म की कहानी दो युवा दुल्हनों के इर्द-गिर्द घूमती है जो ट्रेन यात्रा के दौरान रहस्यमय तरीके से गायब हो जाती हैं, जिससे घटनाओं की एक श्रृंखला शुरू होती है जो महिलाओं के दैनिक जीवन में आने वाली जटिलताओं और चुनौतियों को उजागर करती है। लापता दुल्हनों की खोज के माध्यम से, कहानी ग्रामीण समाज की जटिल गतिशीलता को उजागर करती है, महिलाओं की लचीलापन और ताकत को उजागर करती है क्योंकि वे विभिन्न सामाजिक दबावों और बाधाओं से गुजरती हैं। यह मार्मिक अन्वेषण पारंपरिक रूप से पितृसत्तात्मक सेटिंग्स में लैंगिक समानता और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए चल रहे संघर्ष पर प्रकाश डालता है।
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