तेहरान का अंधेरा: तानाशाही के दमन और विदेशी साम्रा...
Posted by Arif Aziz | Jan 19, 2026 | Geo Politics, Political | 0 |
‘प्राउड आर ®’विवाद: एसी कमरों का ‘छद्म फेमिन...
Posted by Arif Aziz | Jan 16, 2026 | Social Justice and Activism | 0 |
शरीयत, संवैधानिक समानता और पसमांदा समाज का भविष्य...
Posted by Arif Aziz | Dec 31, 2025 | Education and Empowerment | 0 |
इस्लाम में अक़्ल, बहस और ख़ुदा की तलाश...
Posted by Arif Aziz | Dec 29, 2025 | Education and Empowerment | 0 |
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Popularपुस्तक समीक्षा: इस्लाम का जन्म और विकास
by Abdullah Mansoor | May 1, 2024 | Book Review | 0 |
मशहूर पाकिस्तानी इतिहासकार मुबारक अली लिखते हैं कि इस्लाम से पहले की तारीख़ दरअसल अरब क़बीलों का इतिहास माना जाता था। इस में हर क़बीले की तारीख़ और इस के रस्म-ओ-रिवाज का बयान किया जाता था। जो व्यक्ति तारीख़ को महफ़ूज़ रखने और फिर इसे बयान करने का काम करते थे उन्हें रावी या अख़बारी कहा जाता था। कुछ इतिहासकार इस्लाम और मुसलमान में फ़र्क़ करते हैं।
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राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका: चुनौतियाँ और समाधान
by Abdullah Mansoor | Sep 7, 2024 | Education and Empowerment | 0 |
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भारतीय संविधान: पसमांदा समाज की ढाल और हमारे वजूद का दस्तावेज
by Arif Aziz | Jan 24, 2026 | Culture and Heritage, Education and Empowerment | 0 |
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तेहरान का अंधेरा: तानाशाही के दमन और विदेशी साम्राज्यवाद के बीच पिसता ईरान
by Arif Aziz | Jan 19, 2026 | Geo Politics, Political | 0 |
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Top Ratedफिल्म जो जो रैबिट: नाज़ी प्रोपेगेंडा की ताकत और बाल मनोविज्ञान
by Abdullah Mansoor | Jul 17, 2024 | Movie Review, Reviews | 0 |
जोजो रैबिट (Roman Griffin Davis) 10 साल का एक लड़का है। यह तानाशाह के शासनकाल (Totalitarian regime) में पैदा हुआ है। इसलिए जोजो के लिए स्वतंत्रता, समानता, अधिकार जैसे शब्द कोई मायने नहीं रखते क्योंकि उसने कभी इन शब्दों का अनुभव ही नहीं किया है। जोजो सरकार द्वारा स्थापित हर झूठ को सत्य मानता है। सरकार न सिर्फ डंडे के ज़ोर से अपनी बात मनवाती है बल्कि वह व्यक्तियों के विचारों के परिवर्तन से भी अपने आदेशों का पालन करना सिखाती है। आदेशों को मानने का प्रशिक्षण स्कूलों से दिया जाता है। स्कूल किसी भी विचारधारा को फैलाने के सबसे बड़े माध्यम हैं। हिटलर ने स्कूल के पाठ्यक्रम को अपनी विचारधारा के अनुरूप बदलवा दिया था। वह बच्चों के सैन्य प्रशिक्षण के पक्ष में था, इसके लिए वह बच्चों और युवाओं का कैंप लगवाता था। जर्मन सेना की किसी भी कार्रवाई पर सवाल करना देशद्रोह था। सेना का महिमामंडन किया जाता था ताकि जर्मन सेना द्वारा किए जा रहे अत्याचार किसी को दिखाई न दे। बच्चों के अंदर अंधराष्ट्रवाद को फैलाया जाता था। इसी तरह जोजो भी खुद को हिटलर का सबसे वफादार सिपाही बनाना चाहता है
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Prophet Muhammad: A Life of Leadership and Teaching
by Azeem Ahmed | Oct 6, 2024 | Biography | 0 |
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भारतीय संविधान: पसमांदा समाज की ढाल और हमारे वजूद का दस्तावेज
by Arif Aziz | Jan 24, 2026 | Culture and Heritage, Education and Empowerment | 0 |
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Latestभारतीय संविधान: पसमांदा समाज की ढाल और हमारे वजूद का दस्तावेज
by Arif Aziz | Jan 24, 2026 | Culture and Heritage, Education and Empowerment | 0 |
26 जनवरी वह दिन है जब भारत ने संविधान के ज़रिये बराबरी, आज़ादी और न्याय पर आधारित नया सामाजिक समझौता अपनाया। संविधान ने सत्ता को जनता के अधीन किया, बहुमत और सरकार पर कानून की लगाम लगाई और जाति-धर्म आधारित अन्याय तोड़ा। इसी ने पसमांदा समाज को नागरिक अधिकार, आरक्षण, प्रतिनिधित्व और न्यायिक सुरक्षा दी। संविधान से ही पसमांदा सुरक्षित है, और पसमांदा की सुरक्षा से भारत मज़बूत।
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तेहरान का अंधेरा: तानाशाही के दमन और विदेशी साम्राज्यवाद के बीच पिसता ईरान
by Arif Aziz | Jan 19, 2026 | Geo Politics, Political | 0 |
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‘प्राउड आर ®’विवाद: एसी कमरों का ‘छद्म फेमिनिज्म’
by Arif Aziz | Jan 16, 2026 | Social Justice and Activism | 0 |
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चूहा दौड़ और हमारी ज़िंदगी
by Arif Aziz | Jan 9, 2026 | Education and Empowerment, Miscellaneous | 0 |
भारतीय संविधान: पसमांदा समाज की ढाल और हमारे वजूद का दस्तावेज
by Arif Aziz | Jan 24, 2026 | Culture and Heritage, Education and Empowerment | 0 |
26 जनवरी वह दिन है जब भारत ने संविधान के ज़रिये बराबरी, आज़ादी और न्याय पर आधारित नया सामाजिक समझौता अपनाया। संविधान ने सत्ता को जनता के अधीन किया, बहुमत और सरकार पर कानून की लगाम लगाई और जाति-धर्म आधारित अन्याय तोड़ा। इसी ने पसमांदा समाज को नागरिक अधिकार, आरक्षण, प्रतिनिधित्व और न्यायिक सुरक्षा दी। संविधान से ही पसमांदा सुरक्षित है, और पसमांदा की सुरक्षा से भारत मज़बूत।
Read Moreतेहरान का अंधेरा: तानाशाही के दमन और विदेशी साम्राज्यवाद के बीच पिसता ईरान
by Arif Aziz | Jan 19, 2026 | Geo Politics, Political | 0 |
ईरान जनवरी 2026 में गंभीर संकट से गुजर रहा है—इंटरनेट बंद है, सड़कों पर दमन जारी है और 500 से अधिक मौतों व हजारों गिरफ्तारियों ने हालात को गृहयुद्ध जैसी स्थिति बना दिया है। जनता महंगाई, मुद्रा गिरावट और अमेरिकी प्रतिबंधों से उत्पन्न आर्थिक तबाही के खिलाफ भूख के विद्रोह में उतर आई है। दूसरी ओर अमेरिका और इज़रायल इस अस्थिरता को अपने भू-राजनीतिक हितों के लिए भुनाना चाहते हैं, ताकि ईरान को कमजोर कर सत्ता परिवर्तन कराया जा सके। ईरानी अवाम मौजूदा शासन और बाहरी हस्तक्षेप—दोनों के बीच पिस रही है, जबकि देश की संप्रभुता खतरे में है।
Read More‘प्राउड आर ®’विवाद: एसी कमरों का ‘छद्म फेमिनिज्म’
by Arif Aziz | Jan 16, 2026 | Social Justice and Activism | 0 |
सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर दिविजा भसीन द्वारा शुरू किया गया “#ProudRandi” ट्रेंड एक खतरनाक डिजिटल भ्रम साबित हुआ। अपमानजनक शब्द “रंडी” को ‘रिक्लेम’ करने के नाम पर नाबालिग लड़कियों तक को अश्लील, वयस्क और शोषक भाषा अपनाने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे POCSO तक के मामले दर्ज हुए। यह आंदोलन फेमिनिज्म नहीं, बल्कि रेज-बेटिंग और वायरलिटी का खेल था। इसने देह-व्यापार और जातिगत शोषण झेल रही हाशिए की महिलाओं के दर्द का मज़ाक बनाया। असली नारीवाद सम्मान, बराबरी और सामाजिक बदलाव की बात करता है—न कि गालियों को ‘सशक्तिकरण’ बनाकर बच्चों को यौनिककरण की ओर धकेलने की।
Read Moreचूहा दौड़ और हमारी ज़िंदगी
by Arif Aziz | Jan 9, 2026 | Education and Empowerment, Miscellaneous | 0 |
लेखक ~अब्दुल्लाह मंसूर अमेरिकी हास्य कलाकार लिली टॉमलिन का एक मशहूर कथन है “चूहा दौड़ की सबसे बड़ी...
Read Moreवेनेजुएला का संकट: तेल, तख्तापलट और ‘जंगल राज’
वेनेजुएला में 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी फौज द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले इस देश पर अमेरिका ड्रग तस्करी और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाता है, लेकिन विश्लेषकों के अनुसार असली मकसद तेल संसाधनों पर नियंत्रण है। 200 साल पुराने ‘मुनरो सिद्धांत’ की तर्ज पर किया गया यह हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन माना जा रहा है। अमेरिका की 900 से अधिक आर्थिक पाबंदियों ने वेनेजुएला को पंगु बनाया, जबकि चीन–रूस ने कार्रवाई की निंदा की है। यह संकट साम्राज्यवाद बनाम संप्रभुता की नई जंग बन चुका है।
Read Moreशरीयत, संवैधानिक समानता और पसमांदा समाज का भविष्य
by Arif Aziz | Dec 31, 2025 | Education and Empowerment | 0 |
लेख समान नागरिक संहिता (UCC) को व्यक्ति के मौलिक अधिकारों और सामाजिक न्याय के संदर्भ में देखता है। लेखक तर्क देते हैं कि विविधता के नाम पर भेदभावपूर्ण पर्सनल लॉ को जारी रखना गलत है, जिसका सबसे बड़ा नुकसान पसमांदा महिलाओं को होता है। वे बताते हैं कि शरीयत अपरिवर्तनीय नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से समयानुकूल व्याख्याओं से बदली है। मुस्लिम देशों और भारतीय न्यायपालिका के उदाहरण सुधार की संभावना दिखाते हैं। लेख में अशराफ नेतृत्व द्वारा बहुसंस्कृतिवाद और ‘कफू’ के जातिवादी ढांचे को ढाल की तरह इस्तेमाल करने की आलोचना है। लेखक के अनुसार UCC पसमांदा महिलाओं के लिए समानता, गरिमा और संवैधानिक नागरिकता की दिशा में आवश्यक कदम है।
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