संक्षिप्त_समीक्षा : Mickey17
बोंग जून-हो, जिन्होंने ‘पैरासाइट’ जैसी ऑस्कर विजेता फिल्म बनाई है, अपनी नई...
Read MorePosted by Arif Aziz | May 10, 2025 | Education and Empowerment, Movie Review, Reviews |
बोंग जून-हो, जिन्होंने ‘पैरासाइट’ जैसी ऑस्कर विजेता फिल्म बनाई है, अपनी नई...
Read MorePosted by Arif Aziz | May 5, 2025 | Culture and Heritage, Political, Social Justice and Activism |
~ अब्दुल्लाह मंसूर कश्मीर के पहलगाम इलाके में हाल ही में जो आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 मासूम लोगों,...
Read MorePosted by Arif Aziz | Apr 19, 2025 | Education and Empowerment, Gender Equality and Women's Rights, Social Justice and Activism |
लेखक: अब्दुल्लाह मंसूर हमारे समाज में बहुत पुरानी एक सोच चली आ रही है, जिसमें मर्दों को औरतों से...
Read MorePosted by Arif Aziz | Jun 10, 2024 | Pasmanda Caste, Political, Social Justice and Activism |
लोकसभा 2024 के चुनाव ने इस बार बहुचर्चित मुद्दा मुस्लिम आरक्षण था। कोई सारे मुसलमानों को आरक्षण देने की बात कर रहा था तो कोई सारे मुसलमानों के आरक्षण को खत्म करने की बात कर रहा था। मुस्लिम आरक्षण सदैव से एक अबूझ पहेली रही है। समाज से लेकर न्यायालायों तक में इस पर बहसें होती रहीं हैं।
सबसे पहले यह तथ्य समझ लेना चाहिए कि EWS (आर्थिक रूप से कमज़ोर) आरक्षण लागू होने के बाद ऐसा कोई मुस्लिम तबका नहीं है जो आरक्षण की परिधि से बाहर हो अर्थात लगभग सारे मुसलमान पहले से ही आरक्षण का लाभ लें रहें हैं। विदित रहे कि मज़हबी पहचान के नाम पर आरक्षण संविधान के मूल भावना के विरुद्ध है कोई भी मज़हब पिछड़ा या दलित नहीं होता है बल्कि उसके मानने वालो में गरीब, पिछड़े और दलित हो सकते हैं जिन्हें ध्यान में रखते हुए आरक्षण की EWS, ओबीसी और एसटी कैटेगरी में अन्य धर्मों के मानने वालों के साथ-साथ सारे मुसलमानों को भी समाहित किया गया।
Posted by Arif Aziz | Jun 6, 2024 | Pasmanda Caste |
यह मात्र हाजी नेसार अंसारी की कहानी नहीं है। मुस्लिम समाज के अंदर का पच्चासी फिसदी हिस्सा रखने वाला ‘पसमांदा’ तबकें की मुसलमानों की कहानी है। जो मुस्लिम समाज में संख्या बल हाने के बावजूद इस्तेमाल किया जाता है।
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