जब बच्चा ज़िद पर अड़ जाए
यह लेख बच्चों की “ज़िद” को भावनात्मक संघर्ष के रूप में समझने पर ज़ोर देता है। लेखक बताता है कि बच्चे तर्क से नहीं, भावना से प्रतिक्रिया करते हैं। उनकी भावनाओं को स्वीकार करना, सही शब्दों में पहचान देना, “लेकिन” की जगह सहयोगी भाषा इस्तेमाल करना, विश लिस्ट या ड्राइंग जैसे उपाय अपनाना और सबसे ज़रूरी—खुद शांत रहना—इन सब से बच्चा सुरक्षित महसूस करता है और धीरे-धीरे बेहतर व्यवहार सीखता है।
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