वंदे मातरम विरोध: पसमांदा को मुख्यधारा से काटने की साजिश
लेख में वंदे मातरम विवाद को धर्म या राष्ट्रवाद नहीं, बल्कि अशराफ़ नेतृत्व की भावनात्मक और डर-आधारित राजनीति बताया गया है। लेखक के अनुसार यह विवाद पसमांदा मुसलमानों के असली मुद्दों—शिक्षा, रोज़गार और हिस्सेदारी—से ध्यान भटकाने का साधन है। इतिहास में 1937 के समझौते से यह प्रश्न सुलझ चुका था, फिर भी इसे बार-बार उछाला जाता है। अशराफ़ वर्ग अपनी सत्ता बचाने के लिए अलगाव को बढ़ावा देता है, जबकि पसमांदा समाज का असली संघर्ष गरीबी, जहालत और राजनीतिक शोषण के खिलाफ होना चाहिए।
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