Why India’s Syncretic Past Matters Now More Than Ever
~Dr. Uzma Khatoon When history is used as a weapon to divide, it’s crucial to remember...
Read MorePosted by Arif Aziz | Nov 14, 2025 | Movie Review |
~Dr. Uzma Khatoon When history is used as a weapon to divide, it’s crucial to remember...
Read MorePosted by Arif Aziz | Nov 14, 2025 | Education and Empowerment |
लेखक: अब्दुल्लाह मंसूर हम सब कभी न कभी खुद से यह सवाल पूछते हैं—हमारे जीवन का मकसद क्या है? हम...
Read MorePosted by Arif Aziz | Nov 12, 2025 | Casteism, Pasmanda Caste, Political, Social Justice and Activism |
**सारांश (100 शब्दों में):**
अब्दुल्लाह मंसूर लिखते हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पसमांदा समाज अब मात्र ‘वोट बैंक’ नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का ‘गेम चेंजर’ बन चुका है। इस आंदोलन की जड़ें आज़ादी से पहले मोमिन कॉन्फ्रेंस और अब्दुल कय्यूम अंसारी के राष्ट्रवादी संघर्ष में हैं। आज पसमांदा राजनीति रोजगार, शिक्षा और सम्मान की हिस्सेदारी पर केंद्रित है। मंडल युग से उभरी यह चेतना अब भाजपा, जदयू और महागठबंधन सभी को प्रभावित कर रही है। बिहार के 72% मुस्लिम पसमांदा हैं और उनकी नई पीढ़ी अशराफ वर्चस्व को चुनौती देते हुए सामाजिक न्याय और समान प्रतिनिधित्व की राजनीति का नया अध्याय लिख रही है।
Posted by Arif Aziz | Nov 10, 2025 | Culture and Heritage, Political, Social Justice and Activism |
अब्दुल्लाह मंसूर लिखते हैं कि न्यूयॉर्क के नए मेयर ज़ोहरान ममदानी की जीत अमेरिकी राजनीति में समानता और प्रतिस्पर्धा के नए संतुलन का प्रतीक है। उनका “डेमोक्रेटिक सोशलिज़्म” ऐसा मॉडल पेश करता है जो बाजार की दक्षता को बनाए रखते हुए नागरिकों को राहत और समान अवसर देता है। वे किराया नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन और चाइल्डकेयर जैसी नीतियों को तकनीकी सुधारों और जवाबदेही से जोड़ते हैं। प्रवासी अनुभव से उपजे ममदानी का समाजवाद आर्थिक असमानता मिटाकर नस्ल और धर्म के भेद खत्म करने की कोशिश है—एक ऐसा लोकतांत्रिक समाजवाद जो करुणा और कुशलता, दोनों को साथ लेकर चलता है।
Read MorePosted by Arif Aziz | Nov 4, 2025 | Culture and Heritage, Education and Empowerment |
असफलता वास्तविक नहीं, बल्कि मानसिक होती है। जब तक जीवन है, तब तक हार अंतिम नहीं होती। लोग दो कारणों से हार मानते हैं—मुश्किल को न समझना और अपने मकसद का स्पष्ट न होना। समाधान है: परिस्थिति को शांत मन से समझना और अपने उद्देश्य को पहचानना। “क्यों” को जानने से व्यक्ति मजबूत होता है। निर्णय सोच-समझकर लें, परिणाम स्वीकार करें और हर अनुभव से सीखें। धैर्य व निरंतरता ही असली सफलता दिलाते हैं।
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