Author: Arif Aziz

वेनेजुएला का संकट: तेल, तख्तापलट और ‘जंगल राज’

वेनेजुएला में 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी फौज द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले इस देश पर अमेरिका ड्रग तस्करी और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाता है, लेकिन विश्लेषकों के अनुसार असली मकसद तेल संसाधनों पर नियंत्रण है। 200 साल पुराने ‘मुनरो सिद्धांत’ की तर्ज पर किया गया यह हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन माना जा रहा है। अमेरिका की 900 से अधिक आर्थिक पाबंदियों ने वेनेजुएला को पंगु बनाया, जबकि चीन–रूस ने कार्रवाई की निंदा की है। यह संकट साम्राज्यवाद बनाम संप्रभुता की नई जंग बन चुका है।

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शरीयत, संवैधानिक समानता और पसमांदा समाज का भविष्य

लेख समान नागरिक संहिता (UCC) को व्यक्ति के मौलिक अधिकारों और सामाजिक न्याय के संदर्भ में देखता है। लेखक तर्क देते हैं कि विविधता के नाम पर भेदभावपूर्ण पर्सनल लॉ को जारी रखना गलत है, जिसका सबसे बड़ा नुकसान पसमांदा महिलाओं को होता है। वे बताते हैं कि शरीयत अपरिवर्तनीय नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से समयानुकूल व्याख्याओं से बदली है। मुस्लिम देशों और भारतीय न्यायपालिका के उदाहरण सुधार की संभावना दिखाते हैं। लेख में अशराफ नेतृत्व द्वारा बहुसंस्कृतिवाद और ‘कफू’ के जातिवादी ढांचे को ढाल की तरह इस्तेमाल करने की आलोचना है। लेखक के अनुसार UCC पसमांदा महिलाओं के लिए समानता, गरिमा और संवैधानिक नागरिकता की दिशा में आवश्यक कदम है।

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