Category: Pasmanda Caste
नाजिर अली : चौरी चौरा विद्रोह का गुमनाम स्वतंत्रता...
Posted by Arif Aziz | Sep 3, 2026 | Biography, Pasmanda Caste | 0 |
अशराफों ने भारत में लागू नहीं होने दिया हजरत मुहम्...
Posted by Arif Aziz | Sep 3, 2026 | Education and Empowerment, Pasmanda Caste, Social Justice and Activism | 0 |
भाग-दो : द्विराष्ट्र सिद्धांत और पसमांदा प्रतिरोध...
Posted by Arif Aziz | Aug 12, 2026 | Culture and Heritage, Pasmanda Caste | 0 |
Gen Z का ऐतिहासिक आंदोलन: अपमान से उठी चिंगारी और ...
Posted by Arif Aziz | Aug 5, 2026 | Education and Empowerment, Political | 0 |
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, ग्लोबल साउथ की भूमिका और भारत की विदेश नीति को लेकर कई महत्वपूर्ण सवालों को सामने रखा। लेख में ब्रिक्स के विस्तार, भारत के ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ दृष्टिकोण, आर्थिक सहयोग, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों की चर्चा की गई है। साथ ही, बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत की कूटनीतिक भूमिका का विश्लेषण किया गया है।
Read More10 अगस्त: अरजाल और गैर-हिंदू दलितों के लिए क्यों है काला दिवस
by Arif Aziz | Sep 17, 2026 | Pasmanda Caste, Political, Social Justice and Activism | 0 |
यह लेख अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जाति के दर्जे पर लगी धार्मिक पाबंदी और उसके अरजाल (दलित मुसलमानों) व अन्य गैर-हिंदू दलितों पर प्रभाव की पड़ताल करता है। इसमें डॉ. आंबेडकर के विचारों, मुस्लिम समाज में जातिगत भेदभाव, विभिन्न आयोगों की रिपोर्टों और सामाजिक संगठनों के संघर्ष के संदर्भ में समान अधिकार और धार्मिक पाबंदी हटाने की मांग को सामने रखा गया है।
Read MoreChallenging the Grand Mufti: Defending Women’s Public Agency
by Arif Aziz | Sep 14, 2026 | Education and Empowerment, Geo Politics | 0 |
A recent controversy over regressive statements about women’s public participation highlights a deeper struggle within Muslim society over gender justice, religious interpretation, and constitutional rights. Drawing on Quranic principles, Islamic history, and contemporary examples, this article challenges patriarchal readings that confine women to domestic spaces. It also centers Pasmanda women, whose struggles with gender, caste, and economic inequality demand grassroots empowerment, education, dignity, and economic independence within India’s constitutional framework.
Read Moreनाजिर अली : चौरी चौरा विद्रोह का गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी
by Arif Aziz | Sep 3, 2026 | Biography, Pasmanda Caste | 0 |
नाजिर अली, चौरी-चौरा विद्रोह के उन गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों में से एक हैं, जिनका संघर्ष इतिहास के मुख्य पन्नों से लगभग गायब कर दिया गया। सरकारी अभिलेखों में दर्ज होने के बावजूद उनकी स्मृति और विरासत उपेक्षित रही। पसमांदा समाज के इस स्वतंत्रता सेनानी के परिवार की आज की मुफलिसी हमें सवाल करने पर मजबूर करती है—क्या आज़ादी के इतिहास में जाति और सामाजिक हैसियत ने भी तय किया कि किसे याद रखा जाएगा?
Read Moreअशराफों ने भारत में लागू नहीं होने दिया हजरत मुहम्मद (स.अ.) का आखिरी पैगाम
by Arif Aziz | Sep 3, 2026 | Education and Empowerment, Pasmanda Caste, Social Justice and Activism | 0 |
हज़रत मुहम्मद (स.अ.) का अंतिम खुतबा समानता, भाईचारे और सामाजिक न्याय का स्पष्ट संदेश देता है। लेकिन भारतीय मुस्लिम समाज में जातिगत भेदभाव और सामाजिक वर्चस्व ने इस संदेश को कमजोर किया। पसमांदा समाज की शिक्षा, सामाजिक सम्मान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सीमाओं के पीछे यही असमान संरचना दिखाई देती है। यह लेख पैगंबर के आदर्श और मुस्लिम समाज की वास्तविकता के बीच के इसी विरोधाभास को सामने रखते हुए सामाजिक बराबरी और न्याय के लिए पसमांदा संघर्ष की जरूरत को रेखांकित करता है।
Read Moreखिलाफत आंदोलन का पसमांदा विश्लेषण
by Arif Aziz | Aug 20, 2026 | Pasmanda Caste, Social Justice and Activism | 0 |
खिलाफत आंदोलन ने भारतीय मुस्लिम राजनीति की दिशा को गहराई से प्रभावित किया और धार्मिक भावनाओं को सियासत के केंद्र में ला दिया। इस लेख के अनुसार, इसका सबसे बड़ा नुकसान पसमांदा समाज को हुआ, जिसे उसके वास्तविक सामाजिक-आर्थिक मुद्दों से हटाकर धार्मिक नारों की राजनीति में उलझाया गया। हिजरत और मोपला विद्रोह जैसी घटनाओं के बाद पसमांदा नेताओं ने अशराफ़-प्रधान राजनीति का विरोध करते हुए सामाजिक न्याय, लोकतंत्र और साझा भारत की वकालत की।
Read Moreभाग-दो : द्विराष्ट्र सिद्धांत और पसमांदा प्रतिरोध
by Arif Aziz | Aug 12, 2026 | Culture and Heritage, Pasmanda Caste | 0 |
डा. फैयाज अहमद फैजी के अनुसार, 1940 के दशक में मोमिन कॉन्फ्रेंस और पसमांदा नेतृत्व ने मुस्लिम लीग के द्विराष्ट्र सिद्धांत का मुखर विरोध किया। आसिम बिहारी और अब्दुल कय्यूम अंसारी जैसे नेताओं ने पसमांदा समाज को सांप्रदायिक राजनीति से सावधान करते हुए लोकतांत्रिक और साझा राष्ट्रवाद की राह दिखाई। 1946 के चुनाव में सीमित मताधिकार और कठिन परिस्थितियों के बावजूद मोमिन कॉन्फ्रेंस की चुनावी सफलता पसमांदा प्रतिरोध की महत्वपूर्ण मिसाल बनी।
Read Moreजंतर-मंतर पर ‘गाली’ देती लड़कियाँ: “गुमराह बच्चे” या गहरा आक्रोश?
by Arif Aziz | Aug 11, 2026 | Education and Empowerment, Political | 0 |
जंतर-मंतर का छात्र आंदोलन केवल परीक्षा-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल नहीं, बल्कि युवाओं के बढ़ते असंतोष, भाषा की राजनीति और बदलती सामाजिक चेतना का आईना है। आक्रामक भाषा को महज अभद्रता मानने के बजाय उसके पीछे छिपे तनाव, निराशा और व्यवस्थागत अविश्वास को समझना जरूरी है। यह घटनाक्रम सवाल उठाता है कि सरकार युवाओं की आवाज़ को दबाएगी या उनके गुस्से के मूल कारणों को समझकर शिक्षा और शासन व्यवस्था में जरूरी बदलाव करेगी।
Read Moreभाग-एक: द्विराष्ट्र सिद्धांत और पसमांदा प्रतिरोध
मुस्लिम लीग के द्विराष्ट्र सिद्धांत और साम्प्रदायिक राजनीति का सबसे संगठित विरोध पसमांदा नेतृत्व वाली मोमिन कॉन्फ्रेंस ने किया। आसिम बिहारी, अब्दुल कय्यूम अंसारी और अन्य नेताओं ने देश-विभाजन, जाति छिपाने की अपील तथा अशराफ वर्चस्व का विरोध करते हुए भारतीय एकता, पसमांदा पहचान और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की वकालत की। उनके अनुसार पाकिस्तान की अवधारणा इस्लामी मूल्यों और भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत दोनों के विपरीत थी, जबकि मुस्लिम लीग बहुसंख्यक पसमांदा मुसलमानों के हितों का प्रतिनिधित्व नहीं करती थी।
Read MoreGen Z का ऐतिहासिक आंदोलन: अपमान से उठी चिंगारी और सत्ता की जवाबदेही
by Arif Aziz | Aug 5, 2026 | Education and Empowerment, Political | 0 |
NEET-UG 2026 के कथित पेपर लीक के बाद शुरू हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ आंदोलन भारत के छात्र इतिहास का एक अनोखा अध्याय बन गया। व्यंग्य से शुरू हुई यह मुहिम लाखों युवाओं की आवाज़ बनकर परीक्षा सुधार, जवाबदेही और संस्थागत पारदर्शिता की मांग तक पहुँची। 37 दिनों के लोकतांत्रिक संघर्ष ने दिखाया कि Gen Z मीम्स, सोशल मीडिया और अहिंसक प्रतिरोध के ज़रिए भी सत्ता को जवाबदेह बनाने की क्षमता रखती है।
Read Moreडिजिटल मीडिया और पसमांदा आंदोलन: पारंपरिक मीडिया का भ्रम, मेरा सफर और भविष्य की राह
by Arif Aziz | Jul 30, 2026 | Casteism, Pasmanda Caste, Political | 0 |
**Excerpt (80 words):**
मुख्यधारा के मीडिया ने लंबे समय तक भारतीय मुसलमानों को एकरूपी समुदाय के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि सच्चाई यह है कि लगभग 85% आबादी पसमांदा मुसलमानों की है, जिनकी आवाज़ और समस्याएँ लगातार हाशिए पर रहीं। डिजिटल मीडिया ने इस मौन को तोड़ते हुए पसमांदा समाज को अपनी बात रखने का मंच दिया है। अब यह संघर्ष केवल पहचान का नहीं, बल्कि शिक्षा, सामाजिक न्याय, संसाधनों में हिस्सेदारी और समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की लोकतांत्रिक लड़ाई बन चुका है।
अशराफी आधिपत्य के बरक्स पसमांदा अस्मिता का घोषणापत्र: ‘भारत के दलित मुसलमान’
by Arif Aziz | Jul 28, 2026 | Book Review, Culture and Heritage, Pasmanda Caste | 0 |
डॉ. मो. अयुब राईन की पुस्तक *भारत के दलित मुसलमान* भारतीय मुस्लिम समाज के भीतर मौजूद जातिगत असमानता, सामाजिक बहिष्कार और पसमांदा समुदाय के ऐतिहासिक उत्पीड़न का गंभीर अध्ययन प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक अशराफ़ी वर्चस्व, धर्मांतरण के बाद भी जारी जातिगत भेदभाव और सामाजिक न्याय के सवालों को तथ्यात्मक ढंग से सामने लाती है। साथ ही, यह पसमांदा समाज की गरिमा, अधिकार और समान भागीदारी के लिए वैचारिक चेतना तथा व्यापक बहुजन एकजुटता की आवश्यकता पर बल देती है।
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