Tag: UniformCivilCodeIndia
शरीयत, संवैधानिक समानता और पसमांदा समाज का भविष्य
by Arif Aziz | Dec 31, 2025 | Education and Empowerment | 0 |
लेख समान नागरिक संहिता (UCC) को व्यक्ति के मौलिक अधिकारों और सामाजिक न्याय के संदर्भ में देखता है। लेखक तर्क देते हैं कि विविधता के नाम पर भेदभावपूर्ण पर्सनल लॉ को जारी रखना गलत है, जिसका सबसे बड़ा नुकसान पसमांदा महिलाओं को होता है। वे बताते हैं कि शरीयत अपरिवर्तनीय नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से समयानुकूल व्याख्याओं से बदली है। मुस्लिम देशों और भारतीय न्यायपालिका के उदाहरण सुधार की संभावना दिखाते हैं। लेख में अशराफ नेतृत्व द्वारा बहुसंस्कृतिवाद और ‘कफू’ के जातिवादी ढांचे को ढाल की तरह इस्तेमाल करने की आलोचना है। लेखक के अनुसार UCC पसमांदा महिलाओं के लिए समानता, गरिमा और संवैधानिक नागरिकता की दिशा में आवश्यक कदम है।
Read More
Recent Posts
- परंपरा से संस्थागत विज्ञान तक: भारत में होम्योपैथी की यात्रा
- Casino En Ligne Français – guide complet 2024
- तालिबान का शरीयत ‘कोड’ या मनुवाद का नया रूप? इस्लामी न्याय और महिला अधिकारों की कसौटी
- Rick and Morty: एक दार्शनिक-वैज्ञानिक व्यंग्य
- सद्दाम के साये से अमेरिका की आमद तक: टर्टल्स कैन फ्लाई और कुर्द बच्चों की दास्तान
Recent Comments
No comments to show.