Tag: AkhriKhuta
अशराफों ने भारत में लागू नहीं होने दिया हजरत मुहम्मद (स.अ.) का आखिरी पैगाम
by Arif Aziz | Sep 3, 2026 | Education and Empowerment, Pasmanda Caste, Social Justice and Activism | 0 |
हज़रत मुहम्मद (स.अ.) का अंतिम खुतबा समानता, भाईचारे और सामाजिक न्याय का स्पष्ट संदेश देता है। लेकिन भारतीय मुस्लिम समाज में जातिगत भेदभाव और सामाजिक वर्चस्व ने इस संदेश को कमजोर किया। पसमांदा समाज की शिक्षा, सामाजिक सम्मान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सीमाओं के पीछे यही असमान संरचना दिखाई देती है। यह लेख पैगंबर के आदर्श और मुस्लिम समाज की वास्तविकता के बीच के इसी विरोधाभास को सामने रखते हुए सामाजिक बराबरी और न्याय के लिए पसमांदा संघर्ष की जरूरत को रेखांकित करता है।
Read More
Recent Posts
- भावनाओं से आगे बढ़कर शिक्षा और प्रतिनिधित्व पर ध्यान दे पसमांदा समाज।
- 10 अगस्त: अरजाल और गैर-हिंदू दलितों के लिए क्यों है काला दिवस
- Challenging the Grand Mufti: Defending Women’s Public Agency
- शिक्षक दिवस: चाक की धूल, व्यवस्था के सवाल और कक्षा से खिलती उम्मीद
- नाजिर अली : चौरी चौरा विद्रोह का गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी
Recent Comments
No comments to show.