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तालिबान का शरीयत ‘कोड’ या मनुवाद का नया रूप? इस्लामी न्याय और महिला अधिकारों की कसौटी
by Arif Aziz | Apr 27, 2026 | Geo Politics | 0 |
तालिबान द्वारा लागू नया कानून न्याय नहीं, बल्कि एक संकुचित सोच का प्रतिबिंब है जो महिलाओं को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित करता है। घरेलू हिंसा की सीमित परिभाषा और न्यायिक प्रक्रियाओं में भेदभाव, इस्लामी मूल्यों—अदल (न्याय) और रहमत (दया)—के विपरीत है। यह स्पष्ट करता है कि कठोर कबीलाई परंपराओं को धर्म का रूप देकर समाज में असमानता को वैध ठहराया जा रहा है।
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