क्या आप भी खत्म हुई जंग लड़ रहे?
लेख हिरू ओनोदा की सच्ची कहानी के जरिए जिद, भ्रम और गलत वफादारी के खतरों को दिखाता है। 1944 में युद्ध पर भेजे गए ओनोदा ने अपने अधिकारी के आदेश को सच मानते हुए 29 साल तक जंगल में छिपकर जीवन बिताया, जबकि युद्ध 1945 में ही खत्म हो चुका था। वह भ्रम में निर्दोष लोगों को दुश्मन समझता रहा और अपनी जवानी गँवा बैठा। 1974 में सच सामने आने पर उसे अहसास हुआ कि वह एक गैर-मौजूद युद्ध लड़ रहा था। यह कहानी सिखाती है कि अंधी जिद नहीं, सही समय पर जागरूकता और छोड़ देना ही सच्ची समझदारी है।
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